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जो पानी को रोकते हैं, बांधते हैं, उनका अगला जन्म कष्टकर होता है


मिस्र में पुनर्जन्म के देवता ओसिरिस


अपने यहां मोक्ष की कामना, परलोक में बेहतरी या अगले जन्म में सुंदरतम जीवन की कामना के साथ अनेकानेक मार्ग अपनाये जाते हैं. देवदर्शन से लेकर दानपुण्य की एक विशाल दुनिया है. हालांकि एक मार्ग ईमानदारी, अहिंसात्मक रास्ता का भी अपनाये जाने की परंपरा रही है. लेकिन ऐसी ही कामना के साथ दुनिया के दूसरे देशों में भी अलग-अलग तरीके के उद्यम किये जाते हैं, उपाय अपनाये जाते हैं.


दुनिया के तमाम देशों या धर्मों में सबसे दिलचस्प है मिस्र की परंपरा को जानना. मिस्र में एक देवता हैं ओसिरिस. जीवन मृत्यु,पुनर्जन्म और उर्वरता के देवता. अगर किसी को अगले जनम में और बेहतर जीवन की कामना करनी होती है तो ओसिरिस के सामने यह प्रतिज्ञाएं दुहरानी होती हैं. संकल्प लेना होता है. बयान करना पड़ता है.


1. मैंने हत्या नहीं की. मैंने हत्या का आदेश नहीं दिया.

2. मैंने पशुओं से क्रूरता नहीं की.

3. मैंने पशुओं को चारागाह से नहीं खदेड़ा.

4. मैंने पक्षियों का शिकार नहीं किया.

5. मैंने कछारों में मछलियां नहीं पकड़ीं.

6. मैंने आहार नहीं छीना.

7. मैंने किसी को रूलाया नहीं.

8. मैंने गरीब को सताया नहीं.

9. मैंने किसी को बीमार नहीं बनाया.

10. मैंने किसी को दुख नहीं दिया.

11. मैंने झगड़ा नहीं लगाया.

12. मैंने परूष वचन नहीं बोला.

13. मैंने छिपकर किसी की बात नहीं सुनी.

14. मौसम में मैंने पानी रोककर नहीं रखा.

15. मैंने बहते पानी को नहीं बांधा.


16. मैंने ऐसी आग को नहीं बुझाया जिसे जलते रहना चाहिए था.

इस तरह की और भी कई प्रतिज्ञाएं. और आखिर में यह घोषणा की कि मैं निष्कलुष हूं. इससे साफ है कि प्रतिज्ञा सिर्फ अपने करने की नहीं बल्कि यह भी कि न किया, न करवाया.


नोट: इस प्रसंग को भगवान सिंह ने अपनी किताब भारतीय परंपरा की खोज में विस्तार से लिखा है. भगवान सिंह की यह किताब नया ज्ञानोदय में प्रकाशित उनके लेखों का संग्रह है.

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